Constantine In Hindi (480p 2026)
प्रभावित होकर, कॉन्स्टेंटाइन ने अपने सैनिकों की ढालों पर ईसाई प्रतीक 'क्राइस्टोग्राम' (Chi-Rho) बनवा दिया। मिल्वियन ब्रिज के युद्ध में उन्होंने मैक्सेंटियस को बुरी तरह पराजित किया। यह जीत रोमन साम्राज्य के लिए तो चरम पर थी ही, साथ ही इसने कॉन्स्टेंटाइन को ईसाई धर्म की तरफ झुका दिया। हालाँकि उनका पूर्ण बपतिस्मा अपने जीवन के अंतिम समय (337 ईस्वी) में हुआ, लेकिन इस घटना के बाद से वे ईसाई धर्म के संरक्षक बन गए।
कॉन्स्टेंटाइन ने पूर्वी सम्राट लिसिनियस के साथ मिलकर 313 ईस्वी में "मिलान का आदेश" (Edict of Milan) जारी किया। यह एक क्रांतिकारी कदम था, क्योंकि इस आदेश ने रोमन साम्राज्य में सभी धर्मों, विशेषकर ईसाई धर्म को, कानूनी मान्यता प्रदान की। इससे पहले ईसाइयों पर अत्याचार होते थे, उन्हें शेरों के आगे फेंक दिया जाता था और उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाती थी। मिलान के आदेश ने इन अत्याचारों को समाप्त कर दिया और ईसाई धर्म को फलने-फूलने का अवसर दिया। constantine in hindi
इतिहास के पन्नों में कुछ शासक ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपने युग को ही नहीं, बल्कि सदियों के भविष्य को भी प्रभावित करते हैं। फ्लेवियस वैलेरियस औरेलियस कॉन्स्टेंटाइन, जिन्हें 'कॉन्स्टेंटाइन द ग्रेट' के नाम से जाना जाता है, बिल्कुल ऐसे ही शासक थे। वे रोमन साम्राज्य के उस सम्राट थे जिन्होंने न केवल एक विशाल साम्राज्य को फिर से एकजुट किया, बल्कि विश्व के सबसे बड़े धर्मों में से एक, ईसाई धर्म, को भूमिगत से बाहर निकालकर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया। विशेषकर ईसाई धर्म को
कॉन्स्टेंटाइन ने एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने रोम को छोड़कर बोस्फोरस जलडमरूमध्य के किनारे बसे प्राचीन शहर 'बीजान्टियम' को नई राजधानी बनाने का फैसला किया। 330 ईस्वी में इस शहर का उद्घाटन हुआ और इसे 'नोवा रोमा' (न्यू रोम) नाम दिया गया, लेकिन यह 'कॉन्स्टेंटिनोपल' (आज का इस्तांबुल) के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह शहर अगले हज़ार सालों तक ईसाई दुनिया की राजधानी रहा। constantine in hindi
यहाँ विषय "कॉन्स्टेंटाइन" पर हिंदी में एक लेख प्रस्तुत है: